दहशत पार्ट–3: भालू के खौफ में पहाड़, विभाग खामोश—नरेंद्र सिंह नेगी का गीत फिर हो रहा याद

दहशत पार्ट–3: भालू के खौफ में पहाड़, विभाग खामोश—नरेंद्र सिंह नेगी का गीत फिर हो रहा याद

दहशत पार्ट–3: भालू के खौफ में पहाड़, विभाग खामोश—नरेंद्र सिंह नेगी का गीत फिर हो रहा याद

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भालू की बढ़ती सक्रियता ने एक बार फिर दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग नरेंद्र सिंह नेगी के चर्चित गीतों को याद करने लगे हैं, जो कभी सामाजिक पीड़ा और सिस्टम की चुप्पी का प्रतीक बने थे।

 

ग्रामीण क्षेत्रों में भालू के हमलों और उनकी खुलेआम आवाजाही से लोग भयभीत हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग हालात की गंभीरता के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

 

इस बीच वन मंत्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि ठोस और स्थायी समाधान के बजाय किराए के शूटरों के भरोसे समस्या से निपटने की कोशिश की जा रही है, जो न तो सुरक्षित है और न ही दीर्घकालिक समाधान।

 

ग्रामीणों की मांग है कि सरकार और वन विभाग तत्काल ठोस कदम उठाए, ताकि लोगों को इस दहशत से राहत मिल सके। सवाल यह है कि आखिर कब तक पहाड़ के लोग डर के साये में जीने को मजबूर रहेंगे और सिस्टम की खामोशी यूं ही बनी रहेगी।