देहरादून में वीआईपी नंबरों की होड़: 0001 ने तोड़ा रिकॉर्ड, स्टेटस सिंबल बना गाड़ियों का नया शौक

देहरादून में वीआईपी नंबरों की होड़: 0001 ने तोड़ा रिकॉर्ड, स्टेटस सिंबल बना गाड़ियों का नया शौक

देहरादून में वीआईपी नंबरों की होड़: 0001 ने तोड़ा रिकॉर्ड, स्टेटस सिंबल बना गाड़ियों का नया शौक

 

 

देहरादून में अब गाड़ियों की पहचान सिर्फ ब्रांड या मॉडल से नहीं, बल्कि उनके नंबर प्लेट से भी तय होने लगी है। खास और आकर्षक नंबरों को लेकर लोगों में ऐसा जुनून देखने को मिल रहा है कि वे लाखों रुपये खर्च करने से भी पीछे नहीं हट रहे। ताज़ा मामला देहरादून का है, जहां वाहन पंजीकरण के दौरान 0001 नंबर पाने के लिए बोली 13.74 लाख रुपये तक पहुंच गई।

परिवहन विभाग द्वारा आयोजित ई-नीलामी में इस वीआईपी नंबर को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। कई लोगों ने इस नंबर के लिए बोली लगाई, लेकिन अंत में सबसे ऊंची बोली लगाने वाले ने इसे अपने नाम कर लिया। अधिकारियों के अनुसार यह रकम सामान्य वाहन पंजीकरण शुल्क से कई गुना अधिक है, लेकिन इसके बावजूद वीआईपी नंबरों की मांग लगातार बढ़ रही है।

शहर में 0001, 0007, 9999, 0786 और 1111 जैसे नंबरों को स्टेटस सिंबल माना जा रहा है। कारोबारियों, नेताओं और प्रभावशाली लोगों के बीच इन नंबरों को अपनी पहचान और रुतबे से जोड़कर देखा जा रहा है। कई लोग मानते हैं कि ऐसा नंबर उनकी सामाजिक हैसियत को दर्शाता है, तो कुछ इसे शुभ मानते हैं।

परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वीआईपी नंबरों की नीलामी से सरकार को अच्छा राजस्व मिल रहा है। एक ही नंबर से लाखों रुपये की आमदनी होना विभाग के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है। ई-नीलामी की प्रक्रिया पारदर्शी होने के कारण इसमें आम लोग भी भाग ले सकते हैं।

हालांकि, कुछ लोग इस बढ़ते ट्रेंड पर सवाल भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब आम नागरिक वाहन खरीदने में ही भारी टैक्स से जूझ रहा है, तब नंबर प्लेट पर इतनी बड़ी रकम खर्च करना असमानता को दर्शाता है। बावजूद इसके, देहरादून में वीआईपी नंबरों का क्रेज थमने का नाम नहीं ले रहा।

कुल मिलाकर, देहरादून की सड़कों पर अब सिर्फ महंगी गाड़ियां ही नहीं, बल्कि महंगे नंबर भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं, और 0001 नंबर की यह नीलामी आने वाले समय में और रिकॉर्ड तोड़ सकती है।