संविदा कर्मियों को राहत: बर्खास्तगी से पहले जांच अनिवार्य — हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
हाईकोर्ट ने संविदा कर्मियों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी भी संविदा कर्मचारी की सेवा बिना जांच के समाप्त नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी होगी।
अदालत ने कहा कि यदि किसी संविदा कर्मचारी पर आरोप लगाए जाते हैं तो पहले उन आरोपों की विधिवत जांच होनी चाहिए। साथ ही संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना जरूरी है।
हाईकोर्ट के अनुसार, केवल संविदा नियुक्ति का आधार बनाकर मनमाने तरीके से बर्खास्त करना संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। प्राकृतिक न्याय के नियम संविदा कर्मियों पर भी समान रूप से लागू होते हैं।
यह फैसला सरकारी विभागों, निगमों और अन्य संस्थानों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि वे संविदा कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया नहीं अपना सकते। जांच प्रक्रिया का पालन न करने पर बर्खास्तगी आदेश को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
इस निर्णय से प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह फैसला भविष्य में संविदा कर्मियों की सेवा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका