“रिश्तों की क़ीमत जताई बेटे ने — पिता का कत्ल संपत्ति के लिए”
एक बेटे ने अपनी मां की मृत्यु के बाद पिताजी की लाखों-करोड़ों की संपत्ति पाने की होड़ में — जिसने हत्या की साज़िश रची। स्थानीय पुलिस को जब साक्ष्य हाथ लगे, तो मामला चौकाने वाला था: बेटे ने पहले पिता से बातचीत की, फिर अपनी दो–तीन जानकारों को बढ़ाकर, गोली मारने की सुपारी दी — और पिताजी घर लौटते समय गोली खाकर मर गए। अदालत में पुख्ता सबूतों के साथ आरोपी पेश किए गए।
सोचने वाली बात: क्या संवेदनाएँ, प्यार और सम्मान — सब बिकाऊ हो गए हैं? जब इंसान ने खुद को संपत्ति का व्यापारी बना लिया, तो रिश्तों की गरिमा कहां रह गई?