उत्तराखंड के गठन को 25 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन जिम कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में बाघों के शिकार के मामलों पर अब तक न तो पूरी जांच हुई है और न ही किसी बड़े आरोपी पर कार्रवाई। वर्ष 2015 में नेपाल बॉर्डर पर बाघ की खाल के साथ पकड़े गए तस्करों से लेकर 2016 में हरिद्वार में बरामद पांच बाघों की खाल तक — हर घटना ने वन विभाग की निगरानी और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े किए।
जांच एजेंसियों के पास वर्षों से ये मामले लंबित हैं। कई बार रिपोर्टें बनीं, फाइलें चलीं, लेकिन सख्त कार्रवाई या दोषियों की पहचान तक सीमित रह गईं। सीबीआई जांच की सिफारिश भी हुई, मगर अब तक नतीजा सामने नहीं आया। विशेषज्ञों का कहना है कि ये सिर्फ वन्यजीव अपराध नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की बड़ी मिसाल है।
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोग मानते हैं कि जब तक सरकार इन मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं लाती, तब तक कॉर्बेट जैसे विश्व प्रसिद्ध पार्क में बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। 25 साल का उत्तराखंड आज भी उस “मौन” का गवाह है, जो बाघों की दहाड़ को दबा
एक्सक्लूसिव : 25 साल का उत्तराखंड, लेकिन कॉर्बेट के बाघ शिकार पर अब भी चुप्पी!